STORYMIRROR

Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance Classics Inspirational

4  

Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance Classics Inspirational

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
2

हम उस से दिल न लगाते तो और क्या करते।
अगर ना रिश्ता निभाने तो और क्या करते।
 
ग़म ए हयात में फैला हुआ अंधेरा है।
अगर न दिल को जलाते तो और क्या करते।

हमें तो तर्ज़ ए तकल्लुम में भी तकल्लुफ था।
मगर न बात बढ़ाते तो और क्या करते।

तमाम लोगों की वाबस्ता मुझ से उम्मीदें।
न अपनी जा़त मिटाते तो और क्या करते।
तमाम लोग अंधेरों से हो गए खा़यफ।
क़लम न अपनी चलाते तो और क्या करते।
हमारे पीठ के हर ज़ख्म दोस्ती के गवाह।
"सगी़र" दोस्त बनाते तो और क्या करते।

 मुज्तस मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ मस्कन

मुफ़ाइलुन फ़इलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन

 1212 1122 1212 22


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance