गजल डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी
गजल डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी
परवरदिगार तू न किसी को निढाल कर।
अल्लाह मेरे रखना सभी को संभाल कर।
तेरी खुशी के वास्ते सब कुछ लुटा दिया।
दिल बेकरार क्यों हुआ इसका खयाल कर।
तुझ पर निसार कर दिया यह अपनी जिंदगी।
तू मुझको हार बैठा है सिक्का उछाल कर।
यह खत नहीं है सिर्फ यह एहसास है मेरे।
रखा है इसमें मैंने कलेजा निकाल कर।
परदेस जा रहा हूं मगर लौट आऊंगा।
रखना तू अपने दिल में मुहब्बत संभाल कर।
सर्दी में ऐसी सर्दी जमे जा रहे हैं लोग।
गर्मी ने रख दिया था सभी को उबालकर।
हर लफ्ज़ में हो दर्द, मगर दर्द हो ग़ज़ल।
हर शेर में सगीर कुछ ऐसा कमाल कर।

