Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Aakansha Garg

Romance

4.5  

Aakansha Garg

Romance

मुझे कोई शिकायत नहीं तुझसे

मुझे कोई शिकायत नहीं तुझसे

2 mins
882


मुझे कोई शिकायत नहीं तुझसे तेरे लिए फैसलों पर सवाल नहीं तुझसे

हां माना तेरे फैसले से नाराज अभी तक हूं

तू ले गया अपने साथ लफ्ज़ भी मेरे इसलिए खामोश अभी तक हूं

वह बेनाम रिश्ता नहीं है दरमियां नजदीक तेरे अभी तक हूं

तुझमें कहीं उलझी हुई सी मैं अभी तक हूं

जब बातें वह प्यार वाली शुरू हमारी हुई थी


कुछ आदतें और बातें हमने बयां खुद के बारे में की थी

तूने बताया था तू तन्हा है अकेला है आसमान में टूटा एक तारा सा है

मैं तुझ जैसी नहीं थी

मैं तुझ जैसी नहीं थी मैं बिन मौसम बारिश की बूंदे थी 

मैं बिन रितु एक पतझड़ सी थी


कुछ देर चुप रहने से मुंह जिसका दुख जाया करता था

हां मैं अपने पापा की वही प्यारी सी गुड़िया थी

तुझे बताया था मैंने मेरी ताकत और कमजोरी क्या थी

किसी का बेशुमार हो जाना और फिर उसे

बयाँ ना कर पाना मेरी शुरू से ही कमजोरी थी


दुनिया से थोड़ी अलग शायद मैं थी

 और आंखों से बया हो जाता है इश्क 

इस बात को भी सच मान बैठी थी

थोड़े पुराने खयालो कि शायद मैं थी 


इश्क को जुबान की जरूरत है इस बात से

अनजान थी तुझे बता ना सकी तेरे लिए कितनी मोहब्बत थी 

शायद इसीलिए जिंदगी तेरा हाथ मेरे हाथ से छोड़ा चुकी थी 

तूने कहा हम अब दोस्त है वैसे भी मंजिल कहां दोनों की साथ लिखी थी 

लोगो से सुना था जिससे मोहब्बत हो जाए उससे सिर्फ दोस्ती रखनी ठीक नहीं थी 

पर तुझे पाने की उम्मीद भी मैं यू छोड़ नहीं सकती थी


तेरा वह दोस्ती का बढ़ाया हुआ हाथ मेरी रूह छू गया था 

रो या खुश हो जाऊं आंखों और होठों के

बीच एक महाभारत शुरू हो गया था 

तुझसे मिलने के लिए अब सोचना पड़ रहा था 

तुझे देख कर अश्क ना बहा जाऊं यह सवाल मन में उठ रहा था 

तुझसे दूर जाने का साहस नहीं रखती थी 

और शायद तू मेरा हो जाए यह उम्मीद अब भी दिल में रखती थी 


दिल और दिमाग के बीच मैंने फिर दिल को जीतने दिया था 

और ज्यादा मत सोच कह कर दिमाग को चुप भी करा दिया था 

तेरा दोस्ती का बढ़ाया हुआ हाथ मैंने थाम लिया था

 

पर लफ्जों से ना करूंगी मोहब्बत बयान

यह भी दिल को समझा लिया था

 मेरी खैरियत को सच समझ बैठने की भूल तुझसे हो गई थी और

अब रेडियो सी बजने वाली वह गुड़िया ताउम्र को खामोश हो गई थी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance