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Dr.Sagheer Ahmad डॉ0सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance Classics Inspirational

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Dr.Sagheer Ahmad डॉ0सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance Classics Inspirational

ग़ज़ल डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी

ग़ज़ल डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी

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  • नर्मी ज़रा रखा करो अपने स्वभाव में। 
  • हालात हैं बिगड़ते सदा ताव ताव में। 
  • किस्मत में जो तुम्हारे है वो मिल के रहेगा। 
  • जब है नहीं नसीब में तो क्यों तनाव में।  
  • उसके लिए बे मअनी है दुनिया की दौलतें। 
  • जीवन ही जिसका कटता रहा हो अभाव में।
  • पांच साल क्षेत्र में आते नहीं कभी।
  • नेता को याद आती है जनता चुनाव में।
  • समानता छलावा है अवसर में आज भी।
  • लोकतंत्र मर रहा है भेदभाव में।
  • देश को ही लूट रहे वो डकैत अब।
  • चुनकर गए थे देश के जो रखरखाव में।
  • अब डूबने से इसको बचाएगा बस खुदा।
  • अपनों ने छेद कर दिया है अपनी नाव में।
  • संदेश भेजते हैं हम दुनिया को प्यार का।
  • नफ़रत बसा हुवा है उधर हाव भाव में।
  • इल्ज़ाम भी "सगीर" हमारे ही सर पे है।
  • धोखे भी हमने खाए हैं उसके लगाव में।


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