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Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Action Classics Inspirational

4.5  

Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Action Classics Inspirational

gazal sagheer

gazal sagheer

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समझ रहा हूं जमाना संभल रहा हूं मैं।
कफ़स से अब तेरे बाहर निकल रहा हूं मैं।

छुपा रहा हूं मोहब्बत को मैं सरे महफिल।
मगर है सच मेरे दिलबर मचल रहा हूं मैं।

तुझे मैं ला सकूं गुलशन के सायबानों में।
तुम्हारे वास्ते खारों पे चल रहा हूं मैं।

छुपा रहा हूं मोहब्बत को मैं सरे महफिल।
मगर है सच मेरे दिलबर मचल रहा हूं मैं।

अगर सम्भाल सको तो संभाल लो मुझको।
खुदा हमारा है हाफिज कि चल रहा हूं मैं।

जो कैफियत है मेरे दिल की हो बयां कैसे।
कि छू रहा हूं तुझे और पिघल रहा हूं मैं।

निकल रहा हूं हथेली से रेत के जैसा।
हथेली बांध के रखो फिसल रहा हूं मैं।

किसी के साथ हमेशा कोई नहीं रहता।
खुदा तुम्हारा है हाफिज कि चल रहा हूं मैं।

शमा में जलते हुए कह रहा था परवाना।
तुम्हारे प्यार की खातिर ही जल रहा हूं मैं।

निकल रहा हूं हथेली से रेत के जैसा।
हथेली बांध के रखो फिसल रहा हूं मैं।

सगीर आंख से उसके उतर रहा दिल में।
उसी के तौर तरीके में ढल रहा हूं मैं।


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