गजल(आसरा)
गजल(आसरा)
भटक गए हैं रास्ते से सब, पथ दर्शक कोई मिलता नहीं, थक चुके हैं
घर से बेघर हो कर कोई आसरा अब मिलता नहीं।
घर से निकल कर, ऐसे भटके दर बदर ,
किसी का खिड़की दरवाजा खुला मिलता नहीं।
सच्चे दिल से याद करके मिल सकता है, खुदा भी,
झूठे, झूठ कहते हैं चन्द लोग, की खुदा किसी को मिलता नहीं।
दूध से नहला कर भगवान को समझते हैं सच्चे भक्त जो,
खुद दूध का धुला कोई मिलता नहीं।
हर कोई नाराज है, एक दूसरे से,
गिला शिकवा किसी का कोई सुनता नहीं।
भूंचाल आए, तूफान भी उठे कई बार, तेरे रहमों
कर्म पर यकीन किसी का गिरता नहीं।
हे खुदा कर ले जुल्म भाईचारे के काबू खुद ही इस कदर, सुदर्शन,
दोस्ती भाईचारा आजकल कोई मिलता नहीं।
मची उथल पुथल हर जगह इस कदर,
कोई समझदार इंसान अब मिलता नहीं।
तू ही कर्ता धर्ता है हर किसी का,
मरहम दिल को लगाने वाला आपके सिवा कोई मिलता नहीं।
