गीत
गीत
तेरी याद सताती है जब जब
नैना बरसात से रहते है
तेरी गलियों में तेरी यादों में
बस ये तो रात से रहते है
बिन बोले ही सब कहते तुम
बिन बोले ही सब सुन लूँ मैं
तुम दूर भले मुझसे हो अभी
पर ख़्वाब तेरे सब बुन लूँ मैं
कहने को हूँ तुझ से दूर मगर,
हम तेरी बात से रहते है
तेरी गलियों में तेरी यादों में
हम तो बस रात से रहते है
तुम्हें जानता हूँ सबसे ज्यादा
पर लगते तुम अनजाने हो
एक पल में अपने बनते हो
एक पल में लगो बेगाने हो
बुझे न पहेली मुझसे ये
हम किस जज्बात से रहते है
तेरी गलियों में तेरी यादों में
हम तो बस रात से रहते है
तुम मुझ में हो मैं तुम में हूँ
बढ़ के इससे रिश्ता ही नहीं
पाक़ीज़ा से इस बन्धन को
संसार कभी समझा ही नहीं
तुझे जीत बनकर के अपनी
हम तो बस मात रहते है
तेरी गलियों में तेरी यादों में
हम तो बस रात से रहते है
राधा कान्हा की तरह ही
अपना प्यारा सा किस्सा है
मुझ में है तेरा तुझ में है मेरा
आधा आधा इक हिस्सा है
बस बात बासाये ये दिल मे
हम तो सौगात से रहते है
तेरी गलियों में तेरी यादों में
हम तो बस रात से रहते है

