STORYMIRROR

Rishabh Tomar

Romance

4  

Rishabh Tomar

Romance

जनवरी औऱ तुम

जनवरी औऱ तुम

1 min
18


तेरे मेरे इश्क में हर प्यार वाली बात

मानो जनवरी की कोई सर्दीली रात

जैसे छाया होता है कोहरा घना घना

तुम छाई हो मेरे मन के हर जज्बात

तेरे संग वक्त कुछ यूँ गुजरता है मेरा 

गर्माहट मिलने पे गुजरती ज्यो रात

तुझे देखना मुकमल होना दुआ काया

कोहरा छट मिले धूप की सौगात

तुझसे मिलना दिल को सुकूँ देता है यूँ 

ज्यो सर्दी में हो जाये आग से मुलाकात

तुमसे दूरी है सर्दी से होती जलन जैसी

खून जमा दे ऐसी इक बर्फ की बरसात

तेरे होने से ही सब नया नया उमंग भरा

तुम जनवरी सी तुमसे मेरी शुरूआत

सरसों सी पीली मटर सी गुलाबी सफ़ेद

चने सी नीली ओस सी रंगों की सौगात

करिश्मा है शिव का मिला मुझे तेरा साथ

यार चाँद छूने की चकोरे की क्या औकात

शिव गौरी से हम, इसके है शिव साक्षी

ऋषभ हर बार वो ही जीते तेरी हो मात।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance