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Devendraa Kumar mishra

Tragedy

4  

Devendraa Kumar mishra

Tragedy

घने वृक्ष

घने वृक्ष

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घने वृक्ष की छांव में 

कुल्हाड़ी लिए बैठा सोच रहा है लकड़हारा 

वृक्ष कांटू तो कुछ पैसे बनाऊँ और घर चलाऊं 

और दूर खड़ा एक सरकारी अफसर सोच रहा है, ये पेड़ काटे तो केस बनाऊँ 

पैसे दे तो केस रफा-दफा करके मैं भी कमाऊं 

पैसे न दे सके तो कटे वृक्ष की लकड़ियां लेकर सोफा बनवाऊं 

दूर खड़ा एक पत्रकार सोच रहा था कि पेड़ 

कटे या बंटे तो मैं खबर बनाऊँ. 


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