STORYMIRROR

कवि धरम सिंह मालवीय

Drama

4  

कवि धरम सिंह मालवीय

Drama

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
336

तरस्ती निगाहों को तरसा रहे हो

हमें छोड़कर के कहा जा रहे हो


कहा मैं कहा दिल कहा यार मेरा

यहाँ है मुहब्बत कहा जा रहे हो


किसी का हुआ ही नही ए जमाना

वहाँ है पराये कहा जा रहे हो


बहुत है परेशा अभी जिंदगी भी

मर मर के तुम क्यूँ जिये जा रहे हो


हुआ कुछ नहीं दिल मुतमईन ऐसा

गमों पर धरम तुम ग़ज़ल गा रहे हो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama