Ruder sharma
Romance Classics Children
बादलों को देख,
मौर पंख फहराएं !
रंग बिरंगी छतरी लेकर,
लोग घूमने जाएं !
काले काले बादल ,
बरखा मस्त बरसाएं,
बरसाने के बाद,
गगन में,
इंद्रधनुष लहराए !
अवध में पधारे...
ओ मेरे शिव!!
गगन में जश्न
योग करो, फुर्...
मेरा नाम पर्य...
क्या यही वो स...
किसान की खुशी
मेरा कृष्ण
कैसा ये समय
कोरोना रे कोर...
जिंदगी का हर पग तुम्हें मैं अर्पित करना चाहती हूँ। जिंदगी का हर पग तुम्हें मैं अर्पित करना चाहती हूँ।
जाओ घटाओ जाओ जाओ, विरहाग्नि न भड़काओ तुम। जाओ घटाओ जाओ जाओ, विरहाग्नि न भड़काओ तुम।
अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में। अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में।
मैंने कभी नहीं मांगा था हाथ तुम्हारा साथ तुम्हारा मैंने कभी नहीं मांगा था प्रीत तुम। मैंने कभी नहीं मांगा था हाथ तुम्हारा साथ तुम्हारा मैंने कभी नहीं मांगा था ...
पर जीवन की संध्या बेला में ये एहसास चरम पर होता है ।। पर जीवन की संध्या बेला में ये एहसास चरम पर होता है ।।
तुम जाते जाते ले गये.. मुझसे मेरी साँझ की तसल्ली.. तुम जाते जाते ले गये.. मुझसे मेरी साँझ की तसल्ली..
याद नहीं आ रही अब मुझे रुक्मणी और राधा.. चुंबकीय आकर्षण में तेरे हो गई अधीर और आधा.. याद नहीं आ रही अब मुझे रुक्मणी और राधा.. चुंबकीय आकर्षण में तेरे हो गई अधीर ...
तुम कहो तो तुम्हारे नाम एक गज़ल लिख दें बरस जाओगे क्या बेवजह तुम्हे बादल लिख दें। तुम कहो तो तुम्हारे नाम एक गज़ल लिख दें बरस जाओगे क्या बेवजह तुम्हे बादल लिख ...
बस तुम यूं ही आ जाना...। बस तुम यूं ही आ जाना...।
एक गीत अपनी मोहोब्बत के लिए।। एक गीत अपनी मोहोब्बत के लिए।।
मैं तो अब भी वही हूँ कशमकश भरे कदम रखते हुए, हाथों में मेघदूत पकड़े, भारी पलकों को थामे... मैं तो अब भी वही हूँ कशमकश भरे कदम रखते हुए, हाथों में मेघदूत पकड़े, ...
मैं बन जाती थी आसमान, वो तारा बनकर मुझमें बिखर जाता था... मैं बन जाती थी आसमान, वो तारा बनकर मुझमें बिखर जाता था...
पात पात प्रतीति परिभाषित, है तुम बिन फागुन अभिशापित। पात पात प्रतीति परिभाषित, है तुम बिन फागुन अभिशापित।
तुम्हारे अंदर वो तमाम रद्द-ओ-बदल जो तुमने सिर्फ़ मेरे लिए किये उनका आभार जता सकूँ मै तुम्हारे अंदर वो तमाम रद्द-ओ-बदल जो तुमने सिर्फ़ मेरे लिए किये उनका आभार ...
तुम्हारी यादों के सफ़र पर रोज रात निकल पड़ती हूँ। तुम्हारी यादों के सफ़र पर रोज रात निकल पड़ती हूँ।
गिनना चाहती हूँ तारों को मैं, चाँद पर बैठना चाहती हूँ, थोड़ी देर... गिनना चाहती हूँ तारों को मैं, चाँद पर बैठना चाहती हूँ, थोड़ी देर...
मैं मचलती हूँ सात सुर-सी बजती वीणा-सी, कोई नश्तर नहीं मेरे वज़ूद के आसपास... मैं मचलती हूँ सात सुर-सी बजती वीणा-सी, कोई नश्तर नहीं मेरे वज़ूद के आसपास...
दिल की अलमारी में मिल गई, अहसासों की पुरानी किताब। दिल की अलमारी में मिल गई, अहसासों की पुरानी किताब।
थोड़ी सी ख़ामोशी मुझे है स्वीकार ... अतिशयोक्ति में डूबा हुआ नहीं चाहिए प्यार ! थोड़ी सी ख़ामोशी मुझे है स्वीकार ... अतिशयोक्ति में डूबा हुआ नहीं चाहिए प्यार !
मुझे अपने कलम की स्याही में सुरक्षित कर लो, मुझे शब्दों की सशक्त श्रृंखला में हीरे सा मुझे अपने कलम की स्याही में सुरक्षित कर लो, मुझे शब्दों की सशक्त श्रृंखला में...