Reena Kakran
Children
बहुत ही सुन्दर फूल है गेंदा,
वर्ष भर उगने वाला पौधा।
सजावट के यह काम आता,
हर उत्सव की शोभा बढ़ाता।।
कई रंगों में पाया जाता,
धरती को रंग-बिरंगी बनाता।
गुजराती में कहते गलगोटा,
मारवाड़ी में हजारी गजरा।।
सन्तोष
मेरा बस्ता
सरकारी स्कूल ...
शिक्षा वरदान
शब्द महिमा
अग्नि परीक्षा
सीमा
एक पल की खबर ...
रक्षाबन्धन
बादाम
बचपन में तेरी उंगली पकड़कर चलना, गोदी की पालकी में सुकून से पलना, तेरी लोरी में चाँद तारों से मिलना, ... बचपन में तेरी उंगली पकड़कर चलना, गोदी की पालकी में सुकून से पलना, तेरी लोरी में च...
जिसको जो मन चाहे ले जाए, हाथ पैर या पेट उठाए सर और धर जो उठाएगा, जिसको जो मन चाहे ले जाए, हाथ पैर या पेट उठाए सर और धर जो उठाएगा,
मेरा बचपन, मेरे सपनों में ही रह गया...! मेरा बचपन, मेरे सपनों में ही रह गया...!
बाग़ में जब तक उसे न देख लूँ मेरी सुबह की सैर जैसे अधूरी है। बाग़ में जब तक उसे न देख लूँ मेरी सुबह की सैर जैसे अधूरी है।
लेकिन वह बूढ़ा सिंह माना नहीं, उसे घसीट कर ले गया नदी के किनारे। लेकिन वह बूढ़ा सिंह माना नहीं, उसे घसीट कर ले गया नदी के किनारे।
'गिल्ली से घरों के काँच तोड़ना,कंचों से दोस्तों के कंचें फोड़ना, पतंगों से घरों की ऊंचाई नापना, बचपन क... 'गिल्ली से घरों के काँच तोड़ना,कंचों से दोस्तों के कंचें फोड़ना, पतंगों से घरों की...
यह कविता आपको अपने बचपन की याद दिलाएगी । यह कविता आपको अपने बचपन की याद दिलाएगी ।
नौ एकम नौ, खुद पर भरोसा करो। नौ दूनी अट्ठारह, इरादा मज़बूत हमारा ।। नौ एकम नौ, खुद पर भरोसा करो। नौ दूनी अट्ठारह, इरादा मज़बूत हमारा ।।
कोई तारें बिछा दो फोन की भगवान के घर तक,मुझे माँ तक बात पहुंचानी है। कोई तारें बिछा दो फोन की भगवान के घर तक,मुझे माँ तक बात पहुंचानी है।
गया था चूहा इक दिन खाने अनाज बाजार में! गया था चूहा इक दिन खाने अनाज बाजार में!
बिन मेहनत के हासिल तख़्त-ओ-ताज नहीं होते। बिन मेहनत के हासिल तख़्त-ओ-ताज नहीं होते।
जो ऊपर गतिमय भीतर शांत रहेगा वहीं समंदर कहलाएगा । जो ऊपर गतिमय भीतर शांत रहेगा वहीं समंदर कहलाएगा ।
माता पिता की बच्चों से बढ़ती आशा, बच्चों की कुछ करने की अभिलाषा, माता पिता की बच्चों से बढ़ती आशा, बच्चों की कुछ करने की अभिलाषा,
गिर जाते हैं मिट्टी में दाने, सूखे फल जो जमा कर रखे थे गिलहरी ने आने वाले समय के लिए टहनियों के ... गिर जाते हैं मिट्टी में दाने, सूखे फल जो जमा कर रखे थे गिलहरी ने आने वाले समय...
गाँधी बापू का था यह सपना, बना ना सके जिसे अभी तक हम अपना।।। गाँधी बापू का था यह सपना, बना ना सके जिसे अभी तक हम अपना।।।
बच्चों देखो यह दुनिया कितनी रंगीन, बंधकर जीवन में मत करो इसे संगीन। बच्चों देखो यह दुनिया कितनी रंगीन, बंधकर जीवन में मत करो इसे संगीन।
कितने सुंदर लगते हैं ये , पके पके से आम। तोतापरी दशहरी लंगड़ा , कर्नाटक बादाम। कितने सुंदर लगते हैं ये , पके पके से आम। तोतापरी दशहरी लंगड़ा , कर्नाटक...
वे माँ-बाप थे जो अब तस्वीरों में चुप हैं हम कलेजे थे उनके, वे हमें लख्ते-जिगर कहते थे... वे माँ-बाप थे जो अब तस्वीरों में चुप हैं हम कलेजे थे उनके, वे हमें लख्ते-जिगर क...
बरगद होने के बाद तुम समझोगे प्रकृति और माँ को। बरगद होने के बाद तुम समझोगे प्रकृति और माँ को।
एक मांँ ही समझती है, अपनी संतान को कैसे पालती है वो...! एक मांँ ही समझती है, अपनी संतान को कैसे पालती है वो...!