Reena Kakran
Children
भाई-बहन का रिश्ता प्यारा,
रक्षाबन्धन त्योहार है न्यारा।
बहन की रक्षा का ये बन्धन,
भाई निभाता है जन्म-जन्म।।
राखी से सजती हैं कलाइयाँ,
बहनें खिलाती हैं मिठाइयाँ।
भैया की सारी बलाएँ लेती,
दिल से खूब दुआएँ हैं देती।।
सन्तोष
मेरा बस्ता
सरकारी स्कूल ...
शिक्षा वरदान
शब्द महिमा
अग्नि परीक्षा
सीमा
एक पल की खबर ...
रक्षाबन्धन
बादाम
रोते-रोते बोली मुझको भी टीवी देखना था आपको रंगोली तो मुझे मोगली देखना था। रोते-रोते बोली मुझको भी टीवी देखना था आपको रंगोली तो मुझे मोगली देखना...
याद आती है बचपन की वो मासूम नादानियाँ, खट्टे- मीठे पल ढेर सारी मस्ती और शैतानियाँ। याद आती है बचपन की वो मासूम नादानियाँ, खट्टे- मीठे पल ढेर सारी मस्ती और शैतान...
अब हे कोविड महाराज बता दो, कब अपने घर आप सिधारेंगे। अब हे कोविड महाराज बता दो, कब अपने घर आप सिधारेंगे।
दूध का फर्क अदा अब मुझे करने दो लव यू मां आकाश। दूध का फर्क अदा अब मुझे करने दो लव यू मां आकाश।
बाल मजदूर मजबूर है, अपने परिवार की मदद करना, उसका दस्तूर है बाल मजदूर मजबूर है, अपने परिवार की मदद करना, उसका दस्तूर है
खूब हंसेगा खूब खेलेगा मां का शेर कहलाएगा। खूब हंसेगा खूब खेलेगा मां का शेर कहलाएगा।
मेरे जीने का तरीका खत्म हो गया, आपका जारी रहा। हम अलग - अलग है। मेरे जीने का तरीका खत्म हो गया, आपका जारी रहा। हम अलग - अलग है।
अब बस एक कदम और उठा, इस बालश्रम को हठा।। अब बस एक कदम और उठा, इस बालश्रम को हठा।।
एक घना दरख्त था जिंदगी के सफर में पड़ाव था वो। एक घना दरख्त था जिंदगी के सफर में पड़ाव था वो।
खुशी की बौछार आयी आता आय गयी होरी खुशी की बौछार आयी आता आय गयी होरी
आशा की रोशनी डुबाने वाले इंसान को किनारे तक पहुँचाती है। आशा की रोशनी डुबाने वाले इंसान को किनारे तक पहुँचाती है।
बनकर शब्दों में यादों की कहानी दीवाली के दीपों सी चमकती है। बनकर शब्दों में यादों की कहानी दीवाली के दीपों सी चमकती है।
कुछ देर तेरे घर पर रूक खिड़की से तुझे बहलाऊंगा। कुछ देर तेरे घर पर रूक खिड़की से तुझे बहलाऊंगा।
गर्मी की छुट्टी का इंतजार रहता सालाना। गर्मी की छुट्टी का इंतजार रहता सालाना।
सर्द मौसम की गुनगुनी धूप की तरह मेरे आस पास है मेरे पापा । सर्द मौसम की गुनगुनी धूप की तरह मेरे आस पास है मेरे पापा ।
रस्ता मी नापेव बन निडर, घर की, या मोरी कहानी, जंगल सहल की रस्ता मी नापेव बन निडर, घर की, या मोरी कहानी, जंगल सहल की
न जाने कितने लोगों को पानी पिलाती है गंगा न जाने कितनों को अमृत से जिलाती है गंगा। न जाने कितने लोगों को पानी पिलाती है गंगा न जाने कितनों को अमृत से जिलाती है...
जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। पेड़ बचाओ पृथ्वी बचाओ। जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। पेड़ बचाओ पृथ्वी बचाओ।
गगन से बादलों का हर नाता पुराना है. गगन से बादलों का हर नाता पुराना है.
गोल-गोल शून्य होता तो है एक। गोल-गोल शून्य होता तो है एक।