Reena Kakran
Children
भाई-बहन का रिश्ता प्यारा,
रक्षाबन्धन त्योहार है न्यारा।
बहन की रक्षा का ये बन्धन,
भाई निभाता है जन्म-जन्म।।
राखी से सजती हैं कलाइयाँ,
बहनें खिलाती हैं मिठाइयाँ।
भैया की सारी बलाएँ लेती,
दिल से खूब दुआएँ हैं देती।।
सन्तोष
मेरा बस्ता
सरकारी स्कूल ...
शिक्षा वरदान
शब्द महिमा
अग्नि परीक्षा
सीमा
एक पल की खबर ...
रक्षाबन्धन
बादाम
कहां खो गई ना जाने वह बचपन की नादानियां…. कहां खो गई ना जाने वह बचपन की नादानियां….
खाना, पीना और रहना जीवन की नैय्या में है बहना। खाना, पीना और रहना जीवन की नैय्या में है बहना।
कृत्य कृत्य की है सदा, जीवन में पहचान। कृत्य कृत्य की है सदा, जीवन में पहचान।
देखकर ईश्वर के सिर पर कम्प्यूटर और मैं डर जाती हूँ। देखकर ईश्वर के सिर पर कम्प्यूटर और मैं डर जाती हूँ।
दारू जब से हुई है बंद दोस्ती तब से हुई कई बार भंग दारू जब से हुई है बंद दोस्ती तब से हुई कई बार भंग
क से कोयल क से कोयल
ख़बर लोमड़ी पर भारी व्याकुल ख़बर मिला नहीं सांचा। ख़बर लोमड़ी पर भारी व्याकुल ख़बर मिला नहीं सांचा।
आपकी वजह से दुनिया एक बेहतर जगह है, और उसके लिए, हम हमेशा के लिए सच्चे रहेंगे। आपकी वजह से दुनिया एक बेहतर जगह है, और उसके लिए, हम हमेशा के लिए सच्चे रहेंग...
आखिरी मुलाकात के वक्त भी तुम सामने रहना।। आखिरी मुलाकात के वक्त भी तुम सामने रहना।।
सात दिन गाड़ी न चलाना, पैदल ही घर आना जाना, सात दिन गाड़ी न चलाना, पैदल ही घर आना जाना,
सब मिलकर हैं हमें सिखाती- 'शक्ति मेल मिलाप से आती। सब मिलकर हैं हमें सिखाती- 'शक्ति मेल मिलाप से आती।
मेरे पापा ने मुझे एक ही बात सिखाई बस जिंदगी में डरना मत मेरे पापा ने मुझे एक ही बात सिखाई बस जिंदगी में डरना मत
तुझे इस देश को प्यार से रखना है, तू ही है उम्मीद मेरे लल्ला। तुझे इस देश को प्यार से रखना है, तू ही है उम्मीद मेरे लल्ला।
तुम आत्मा हो मेरी सब कुछ तो जानती हो, तुम आत्मा हो मेरी सब कुछ तो जानती हो,
देखी मैंने गेहूँ बालियां चना-मटर दिखलाते बाबा देखी मैंने गेहूँ बालियां चना-मटर दिखलाते बाबा
हमें दुलाराने और अंतरिक्ष की सैर कराने को बहुत याद आते हैं बाबा..! हमें दुलाराने और अंतरिक्ष की सैर कराने को बहुत याद आते हैं बाबा..!
मीठा तो बीमारी सदा स्वाद पे भारी मीठा तो बीमारी सदा स्वाद पे भारी
माता कैकयी नहीं कौशल्या बनो तभी यह रिश्ता एक बंधन की तरह बनेगा। माता कैकयी नहीं कौशल्या बनो तभी यह रिश्ता एक बंधन की तरह बनेगा।
आकर मेरी खिड़की पर तुम अपने पंख हिलाओ ना। आकर मेरी खिड़की पर तुम अपने पंख हिलाओ ना।
समय के साथ आदत लगाई सुबह उठकर किताब उठाई समय की कीमत समझा मैने तब बेहतर किया मैने।। समय के साथ आदत लगाई सुबह उठकर किताब उठाई समय की कीमत समझा मैने तब बेहत...