STORYMIRROR

Shraddhaben Kantilal Parmar

Children Stories Inspirational Children

4  

Shraddhaben Kantilal Parmar

Children Stories Inspirational Children

गुड़िया

गुड़िया

1 min
409

छोटे छोटे हाथ की गुड़िया

तुझे क्या कहकर पुकारूँ पुड़िया

कांच सी नाज़ुक डोर है बंधा


मुस्कान से चहल पहल उठा है 

ए प्यारा सा अंगना।

परियों से आई एक प्यारी अप्सरा

जादू की है छड़ी ले आई।


खुशियों से भर दिया मेरा संसार

तेरे आने से फूलों से महक उठी है जिंदगी

तेरे ख्वाबों ख्यालों के रंग बिखरे हैं यहां पे।

घर की जान है मेरी छोटी सी गुड़िया।


Rate this content
Log in