STORYMIRROR

SIDHARTHA MISHRA

Classics Inspirational Children

4  

SIDHARTHA MISHRA

Classics Inspirational Children

साईं तेरे दरबार मैं

साईं तेरे दरबार मैं

1 min
372

साईं तेरे दरबार मैं,

जो कोई भी आता है,

नहीं लौट के जाता कभी खालि हाथ,

जो भी झोली अपनि फैलाता तेरे डर पे।


तुम करते सबकी इच्छा पूरी,

रखते सबका ध्यान,

होती चिंता अपने भक्तों कि,

आपको हरदम साईं भगवान।


पढ़ लेते हो भक्तों के मन कि बात,

है पता आपको सब कुछ,

आप हो अंतर्यामी साईं नाथ।


देते नया जीवन अपने भक्तों को,

दिखलाते हो सही राह।

हो आप ही हमारा सहारा भगवान,

हमारे प्यारे साईं नाथ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics