STORYMIRROR

Manthan Rastogi

Drama

3  

Manthan Rastogi

Drama

फ़रेबी इश्क

फ़रेबी इश्क

1 min
440

अश्को में भी खामियत है

खुशियो में भी एब हैं 

जुर्म है ये आशिकी

और इश्क भी फ़रेब है


कायदे ही कायदे हैं 

प्यार में भी फ़ायदे हैं 

ज़िन्दगी से मौत तक

बस नकलियत के वायदे हैं 

ज़िल्त ओढे लोग हैं 

और पन्नों में अजीब हैं 

जुर्म है ये आशिकी 

और इश्क भी फ़रेब हैं 


हवस भरी रगो में है

या रूहानी कसूर है

ज़िक्र है बस जिस्म का

और जिस्मानी सुरूर है

चेहरे भी केवल

खूबसूरती करीब हैं 

जुर्म है ये आशिकी 

और इश्क भी फ़रेब हैं 


हैं आपके भले अभी

अगले ही वक्त दूर हैं 

उल्फ़ते बेगैरती

मोहब्बते भी चूर हैं 

अब झुठ के व्यापार में 

हर सच बड़ा गरीब हैं 

जुर्म है ये आशिकी 

और इश्क भी फ़रेब है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama