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Manthan Rastogi

Others

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Manthan Rastogi

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स्वयं

स्वयं

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वास्तविक नाता खुद ही से

कर दिया कबका खत्म,

अस्तित्व खुद का खो दिया

सुन इशारे औरो के प्रथम।


कठपुतली दूसरो की

बनने में है क्या मज़ा,

झाँक खुद में मन रतन 

कर दे हौसले गठन।


जो हौसलो से भर उड़ान

पंख खुद के खुद फ़ैला,

खुद के पैरों पर ही चल के

पा ले कुछ जुदा मकाम।



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