शादी से पहले
शादी से पहले
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शादी इस जगत समाज का
है प्रचलित सा एक रिवाज
पर बिन फ़ेरे अब सब तेरे
ये लोकाक्ति का चलन है आज।
ये होना भी लाज़मी के
झट मंगनी पट व्याह गलत,
ये तो बुज़ुर्गो की ज़ुबान
सो रीति रिवाज सब फ़लत।
पर आजकल है लोक सोच एक
विवाह से पहले साथ रहना,
और सोचा समझा ये कदम
ना कोई गफ़लत या ही कहना।
साथ अगर पहले ही रहें
तो जानना आसान है,
साथ ज़िन्दगी गुज़ारना
ना हल्का फ़ुल्का काम है।
इस फ़ैसले को देखते हैं
बेहद गन्दी सी नज़र से,
पर मुतब्क़त की परीक्षा
सुनलो ये आधाक्षर हैं।
शादी है, रहेगा सदा
समाज का प्रचलित रिवाज,
बिन फ़ेरे अब सब तेरे
सुंदर सा ये चलन है आज।
