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Vipin Baghel

Romance

4.7  

Vipin Baghel

Romance

फ़ासले

फ़ासले

1 min
630


फ़ासले कम न हुए दिल के ,

जो दिल में बसाये थे उन लम्हों में ,

दरारें पड़ गयी हैं मन में बेशक ,

पर अभी भी वही प्रेम है बाँहों में।


उस वक्त का क्या जिसको हम ,

हर वक्त साथ बिताया करते थे।

छोटी छोटी प्यारी बातों पर ,

अक्सर जी भर के हंसा करते थे।


हाथ पकड़ कर एक दूजे का ,

खुशियों में रोया करते थे।

क्या हुआ हमारे बीच जो,

बीच अटक कर रह गया।


खेल खेल में यूँ दिल ही ,

कच्ची माटी सा टूट गया।

किसी अमावस मुझसे मेरा ,

चंदा प्यारा रूठ गया। 


जैसे तुम हमसे दूर हुए ,

सब दर्पण चकनाचूर हुए।

अब न जाने किसकी आखों के ,

नए सपन के नूर हुए।


एक अकेली छवि मेरी,

खुद से ही हमसे दूर हुई।

एक कहानी मन में ही,

मन से ही मन में दफ़न हुई।  


कुछ अधूरे सपने ही ,

सपनो में बंध कर रह गए।

कुछ रिश्ते बातों में ही, 

शब्दों में सिमट कर रह गए।


कुछ रिश्तों को लोग ऐंठ में ,

कच्चे धागों सा तोड़ चले।

कुछ आँखे अपनी नजरों को ,

नजरों से ही मोड़ चले।


तुम किसकी किसकी बातों का ,

फिर से उत्तर तक जाओगे।

लौट चलो अपने घर को ,

तृप्ति उसी में पाओगे।




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