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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Romance

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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Romance

नयनों की भाषा

नयनों की भाषा

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नयनों की भाषा

तुम्हीं ने तराशा

पी की गली में

जाने की आशा।।


सोचता है जो जमाना

कह के गया है जमाना

कह के गया है जमाना

तेरा ये पासा

नयनों की भाषा।।


नयनों में सब कह जाना

नशा ये नया है बताना

नशा ये नया है बताना

फैला धुंआ सा

नयनों की भाषा।।


चेहरा ऊपर चढ़ाना

भौहे चढा के बताना

भौहे चढा के बताना

जुड़ा जुआ सा

नयनों की भाषा।।


पूरे जहाँ को सजाना

रचना एक नई बनाना

रचना एक नई बनाना

तन तेरा रुंआसा

नयनों की भाषा।।


आकर गले लग जाना

झूम के बातें बताना

झूम के बातें बताना

मन मेरा छुआ सा

नयनों की भाषा।।


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