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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Romance

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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Romance

बस गए हो।

बस गए हो।

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आँखों मे तुम बस गए हो।।

अपने भी तुम बन गए हो।।


रातें यूँ ही गुजर जाती हैं।

मन में तुम बस गए हो।।


दिल अब लगता नहीं कहीं।

दिल में तुम बस गए हो।।


राहत अब मिलती नहीं है।

सपनों में तुम बस गए हो।।


रिश्ता अब यह गहरा हुआ है।

नयनों में तुम बस गए हो।।


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