STORYMIRROR

मानव सिंह राणा 'सुओम'

Romance

4  

मानव सिंह राणा 'सुओम'

Romance

बस गए हो।

बस गए हो।

1 min
368

आँखों मे तुम बस गए हो।।

अपने भी तुम बन गए हो।।


रातें यूँ ही गुजर जाती हैं।

मन में तुम बस गए हो।।


दिल अब लगता नहीं कहीं।

दिल में तुम बस गए हो।।


राहत अब मिलती नहीं है।

सपनों में तुम बस गए हो।।


रिश्ता अब यह गहरा हुआ है।

नयनों में तुम बस गए हो।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance