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Ervivek kumar Maurya

Romance

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Ervivek kumar Maurya

Romance

एक तेरी कमी है

एक तेरी कमी है

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तू जो नहीं मेरे पास सनम

लगती मुझको एक तेरी कमी है

वर्षों हो गये तुझसे जुदा हुए

आँखों अब भी रहती नमी है

 

हर पल तेरी बातें था करता

तुझ पे ही तो बस मैं था मरता

प्यार तुझे मैं अब भी हूँ करता

इश्क के मेरे तू महकती जमीं है


खुशबू तेरी साँसों में थी बसायी

याद है वो रात भर की मिलायी

तू मुझमें मैं तुझमें था समाया

हर तरफ था इश्क का मौसम छाया

अब मौसम ऐसे हैं जैसे सूखी नदी है


उनका मिलना मेरा खिलना

उनके प्यार का वो गिरता झरना

भीग के उसमें एक एहसास था पाया

उससे ही था मुझको जीना आया

सच कहता हूँ अब 

उसके बिना मेरा कुछ भी नहीं है



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