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Ervivek kumar Maurya

Inspirational

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Ervivek kumar Maurya

Inspirational

बिगड़ेगा क्या अब?

बिगड़ेगा क्या अब?

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कुछ कहो हम खुश हो रहे हैं
एक नया पाठ हम गढ़ रहे हैं

बनाई हैं हमने कश्तियां कागज की
कुछ नया लेकर हम चल रहे हैं 

शाम होते- होते हम पहुंच जायेंगे 
परिंदों की तरह आज हम उड़ रहे हैं

बैठा है कोई राह में आज भी मगर
हम काफिरों सा दर- बदर भटक रहे हैं

उनके चेहरे की मुस्कान न फीकी पड़े
जोकर बन हम तो तमाशे कर रहे हैं

बिगड़ेगा क्या अब, जब कुछ रहा ही नहीं
बन भिखारी मुस्कुरा के रह तो रहे हैं
लवविवेक मौर्या प्रणय 


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