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Gaurav Khandelwal

Romance

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Gaurav Khandelwal

Romance

एहसास ए मोहब्बत

एहसास ए मोहब्बत

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लिखने को मेरे पास है ही क्या 

तेरी मोहब्बत के अलावा 

तू शब्द बनकर उतर जा 

बस इतनी सी ही ख़्वाहिश है मेरी।


ज़न्नत की मुझे चिंता नहीं 

बस तू प्यार बनके उतर जा

इतनी ही आरजू मेरी।


लड़खड़ा जाती है जुबाँ

जाने क्या बक़ बक़

कर जाती है ये जुबाँ

तू मोहब्बत का तराना उतार जा 

इतनी सी तमन्ना है मेरी।


भीड़ में तेरे साए को पहचानना

ये हिम्मत नहीं मेरी

तू खुद अक्स अपना दिखला जा

तो समझूँगा क़िस्मत मेरी।


मैं लिखू तो तू शब्द बनकर उतर जा 

बस इतनी सी ही ख़्वाहिश है मेरी 


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