Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF
Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF

Gaurav Khandelwal

Inspirational


3  

Gaurav Khandelwal

Inspirational


शिक्षकों को प्रणाम

शिक्षकों को प्रणाम

1 min 131 1 min 131

मैं तो शून्य था 

तुमने अनंत जगा दिया

मैं तो दुनिया से हारा था 

तुमने विजेता बना दिया

मैं तो खाली हाथ आया था

तुमने झोली से भर दिया

मैं तो कंकड़ था 

तुमने हीरा बना दिया


मैं तो चला था अनपढ़ गँवार 

तुमने विद्वानों की श्रेणी में

ला दिया

मैं तो बिन फूटा बीज था

तुमने फल से लदा पेड़

बना दिया 

मैं तो अँधेरों के आगोश में था

बिखरा कहीं

तुमने आकाश में ध्रुव तारा

बना दिया


मेरी ज़िंदगी का मतलब था

कुछ नहीं

तुमने जीने का मकसद

सीखा दिया

 

तेरे अहसानों को चुका पाना

मेरे बस में नही

बस आभार से तेरे चरणों में

मैंने सर झुका दिया ।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Gaurav Khandelwal

Similar hindi poem from Inspirational