STORYMIRROR

Pranav Kumar

Tragedy

3  

Pranav Kumar

Tragedy

दवा

दवा

1 min
142

अब तो हिज्र में जीने की आदत हो गई है,

तुम्हारे बाद तो अपनों से भी रुखसत हो गई है,


तुम्हारे प्यार को मजाक में मैं अपना दवा कहा करता था,

अब तो सच में मुझे दवा की जरूरत हो गई है,


एक मासूम से बिछड़ जाने के बाद,

ना जाने कहां मेरी मासूमियत खो गई है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy