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Prafulla Kumar Tripathi

Tragedy

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Prafulla Kumar Tripathi

Tragedy

दर्द की बेहतर दवा !

दर्द की बेहतर दवा !

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बह रही जब तक हमारे सख़्त अफ़वाही हवा, 

हमने पा ली कोरोना के दर्द की बेहतर दवा !


कुछ दिनों तक वानप्रस्थी बन रहें हम और तुम,

संक्रमण का वायरस है आक्रमणकारी हुआ।


ड्रैगनी धरती से उठकर आसमांं तक छा गया,

ये गया और वो गया हिन्दोस्तांं तक आ गया।


दानवी होकर के मानव पशु से बदतर हो चला,

कुदरती आक्रोश के कदमोंं के नीचे आ चला।


संयमी बर्ताव, सात्विक आचरण को भूलकर,

देखने में शांत लेेकिन आग का गोला बना।


आचरण पर्यावरण सब कुुुछ है धूमिल धूसरित,

काल के असमय बिछाए गाल का हिस्सा बना।


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