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Neeru Nigam

Tragedy

4.9  

Neeru Nigam

Tragedy

द्रौपदी

द्रौपदी

1 min
330


है कहां आसान द्रौपदी होना,

प्रेम एक से करो,

मगर रिश्ता पांच से निभाना ।


है कहां आसान द्रौपदी होना,

अर्जुन के लिए भावनाओं को सीने मे रख,

अन्य चार पांडवों को तन सौंपना ।


है कहां आसान द्रौपदी होना,

एक औरत होते हुये भी,

सामान की तरह पांचों मे बंट जाना ।


है कहां आसान द्रौपदी होना,

चौसर की बाजी में,

अपने ही पति द्वारा दांव पर लग जाना ।


है कहां आसान द्रौपदी होना,

अपनों के ही सामने,

अपनो के ही हाथों चीरहरण सा घाव सहना ।


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