STORYMIRROR

Komal Kamble

Abstract Tragedy Inspirational

4  

Komal Kamble

Abstract Tragedy Inspirational

गुमशुदगी

गुमशुदगी

1 min
239

लापता हूं मैं

मेरा जहां गुमशुदा है

खुशियों के उस पार

मेरा कुछ तो रूका है।


बुलाना चाहता हूं उसे पास 

पर वहां जा नहीं सकता

ख्वाइशों की चाहतों की तहत

उन्हें पास बुला नहींं सकता।


जो पीछे छूट आया है

लगता है वो अधूूरी जिंदगी है मेरी

चाहता हूं पूरी करना उसे

पर चाहकर भी पूरी कर नहीं सकता।


उसे पीछे छोड़कर 

आगे तो बढ़ चुका हूं

फिर भी लगता है मुझे

मैं पीछे ही रह गया हूं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract