Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

संजय कुमार

Abstract


3  

संजय कुमार

Abstract


दोस्ती

दोस्ती

1 min 11 1 min 11

बिगड़े हुए जो काम बनाए

वह दोस्ती कहलाए।

मरते दम तक जो साथ निभाए

वह दोस्ती कहलाए।

कदम कदम पर साथ निभाए

वह दोस्ती कहलाए।

हर जख्मों का मलहम बन जाए

वह दोस्ती कहलाए।

गमों के राहों पर राह दिखाए

वह दोस्ती कहलाए।

आंसू के जो मुस्कान बन जाए

वह दोस्ती कहलाए।

दुखों में खुशी का छाया बन जाए

वह दोस्ती कहलाए।

जिंदगी का जो आयना बन जाए

वह दोस्ती कहलाए।

कदमों का जो बैसाखी बन जाए

वह दोस्ती कहलाए।

आंखों की जो रोशनी बन जाए

वह दोस्ती कहलाए।

जीने का जो एहसास कराए

वह दोस्ती कहलाए।

मंजिल तक जो पहुंचाएं

वह दोस्ती कहलाए।



Rate this content
Log in

More hindi poem from संजय कुमार

Similar hindi poem from Abstract