STORYMIRROR

संजय कुमार

Abstract

3  

संजय कुमार

Abstract

DIPAWALI

DIPAWALI

1 min
282

मिल खुशियों के दीप जलाओ

सीता संग रघुवर अवध में आए।


अवध नगर की  व्यथा सुनाओ

अवध के राजा लौट के आए।


जगमग जगमग दिखे संसार

खुशियों के दीप जले हर द्वार।


हर दीपक चाँद सा चमक रहा

पल पल में रोशनी बदल रहा।


चम चम चमके वतन ये प्यारा

आया दीपावली त्यौहार हमारा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract