STORYMIRROR

संजय कुमार

Romance

3  

संजय कुमार

Romance

दो दिलों का आभास

दो दिलों का आभास

1 min
398

दो दिल से मिल एक दिल बने

जीवन की एक लम्बी डोर बने।

                      

आभास मुझे, उनके सांसों की लगे 

लहराती, जब ये मधुर पवनें चले।


महका महका फिर क्यों यहां लगे

जब पवन की लहरें वहां चलें।


सूना सूना सा, हर आलम ये लगे

छोड़ उन्हें, जब हम कुछ दूर चले


चलो क्यों न अब हम वहां चलें

जहां थे उन्हे,हम पहली बार मिले।


दो दिल से मिल एक दिल बने

एक लम्बी जीवन की डोर बने।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance