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Sanket Potphode

Tragedy


4.2  

Sanket Potphode

Tragedy


दो पल की दोस्ती

दो पल की दोस्ती

1 min 187 1 min 187

दो पल की दोस्ती इनकी

जैसे कोई साबुन का झाग

पानी फेरने की इतनी जल्दी

तो बताओ कैसे निकलेंगे दाग।


दागों का तो कुछ नहीं

लोग कहते, दाग अच्छे होते हैं

पर दाग उन्हीं के अच्छे होते हैं

जिनके इरादे सच्चे होते हैं।


इरादों का भी कुछ नहीं

इरादे बदल भी जाते हैं

इरादे बदलना तो समझता हूँ

पर इनके तो लोग भी बदल जाते हैं।


लोगों का भी कुछ नहीं

आज के अपने कल के पराये है

अपनों का पराया होना समझता हूँ

पर काम हो तो

इनका पराया भी अपना होता है !


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