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Ruchi Madan

Romance

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Ruchi Madan

Romance

दिल नहीं है तू मेरा

दिल नहीं है तू मेरा

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तेरी यादें जब भी सोचता हूँ

अब आती नहींं मुझे

फिर तो बस

जैसे कसके सीने से लग जाती है मेरे।


हर तराने को छेड़ देती है

दिल के वो मेरे

इतना अब भी बसा है तू मुझमें।


कि खुद को भी याद नहीं हूँ इतना

जिन जख्मों के निशाँ

भी है नहीं अब तो

तुम फिर भी उन्हें छेड़ देते हो।


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