दिल के रिश्ते
दिल के रिश्ते
कल तक तो थे तुमसे अंजान हम ,
आज तुम सांसों में बसने लगे हो ।
प्यार इतना करने लगे तुमसे कि ,
तुम हमारी जान बन गए हो ।
माना की कोई हक तुमने हमें दिया नहीं ,
कसमे औ वादे की रसमें भी नहीं निभाई ।
पर दिल कब मानता है इन बंदिशों को ,
ये तो आत्मा से आत्मा की है सगाई ।
तुम हमे जानो न जानो ,
मानो य़ा न मानो ,
ये तुम्हारी प्रीत है ।
हमने तो नाता जोड़ लिया ,
मन से मन को मोड़ लिया ,
ये हमारी प्रीत है ।
ये जन्मो का बंधन हमने तुमसे बाँधा है ,
तुम में ही मन को साधा है ।
जीते हैं तुम्हे देख औ मरना भी तुम्हारे लिये ,
क्योंकि तुम बिन हमारा जीवन आधा है ।
जग की रीत मैं न जानू ,
प्यार को ही ईश्वर मानू ,
परवाह तुम्हारी करते हैं हम ,
इस शरीर की आत्मा बन गए हो तुम ।

