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Manju Rai

Romance

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Manju Rai

Romance

दिल के रिश्ते

दिल के रिश्ते

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कल तक तो थे तुमसे अंजान हम ,

आज तुम सांसों में बसने लगे हो ।

प्यार इतना करने लगे तुमसे कि ,

तुम हमारी जान बन गए हो ।

माना की कोई हक तुमने हमें दिया नहीं ,

कसमे औ वादे की रसमें भी नहीं निभाई ।

पर दिल कब मानता है इन बंदिशों को ,

ये तो आत्मा से आत्मा की है सगाई ।

तुम हमे जानो न जानो ,

मानो य़ा न मानो ,

ये तुम्हारी प्रीत है ।

हमने तो नाता जोड़ लिया ,

मन से मन को मोड़ लिया ,

ये हमारी प्रीत है ।

ये जन्मो का बंधन हमने तुमसे बाँधा है ,

तुम में ही मन को साधा है ।

जीते हैं तुम्हे देख औ मरना भी तुम्हारे लिये ,

क्योंकि तुम बिन हमारा जीवन आधा है ।

जग की रीत मैं न जानू ,

प्यार को ही ईश्वर मानू ,

परवाह तुम्हारी करते हैं हम ,

इस शरीर की आत्मा बन गए हो तुम ।


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