STORYMIRROR

Nitu Rathore Rathore

Abstract Romance Inspirational

4  

Nitu Rathore Rathore

Abstract Romance Inspirational

धुंधलापन

धुंधलापन

1 min
424

लालिमा छायेगी ज्यों- ज्यों ही अरुणाई की

धुन सुनाई न देगी त्यों ही तरुणाई की।


रंग फूलों में भरा आज बता फिर किसने

फिर हथेली सेंकी सूरज ने ही हरजाई की।


अनछुई तुम अनछुआ सा है यौवन तेरा

चाँद से बात करे हम तेरी रानाई की।


तुम समझती ही नहीं दर्द मेरा क्या सचमुच

कू-ब -कू फैल गई बात शनासाई की।


तुम बैठो पास मेरे आँखों में धुँधलापन है

"नीतू" सूनेपन में कैसे बात हो गहराई की।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract