STORYMIRROR

Vasudeo Sao 'vrind'

Abstract

4  

Vasudeo Sao 'vrind'

Abstract

दीपावली -अभिनंदन **********

दीपावली -अभिनंदन **********

1 min
246

दीपमालिके

यह मेरा वंदन ,

अभिनंदन -अभिनंदन।


दीप पर्व आया है 

पुलकित है मन, 

नतेमस्तक हो,  

सदा अभिनव वंदन।


जैसे दीपक और बाती, 

वैसेे धागा और मोती,

हरित हुई यह धरती 

सरस हृदय हंसती।


हर मन में आया है उमंग,

जन -गण मन, 

यह मेरा वंदन। 

अभिनंदन -अभिनंदन।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract