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Brijlala Rohanअन्वेषी

Tragedy Action Thriller

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Tragedy Action Thriller

देश के विभाजन विभीषिका की याद

देश के विभाजन विभीषिका की याद

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खून से सनी वो वीरान सड़कें,

दहशत को वो खौफनाक मंजर!

और मौत का वो तांडव ,

और हर और गूंजती त्राहिमाम- त्राहिमाम !


कल्पना में ही ये चित्र कितनी बीभत्स और विचित्र लग रहें हैं !

जरा सोचिए उनलोगों की उन प्रतिकूल परिस्थितियों में मनःस्थिति को, 

जो इसके प्रत्यक्ष गवाह रहें होंगे !

जी हाँ ! कुछ ऐसी ही थी हमारे देश के विभाजन से उपजी त्रासदी!


एक तरफ़ जहां देश अंग्रेजों की सैकड़ों वर्षों की ग़ुलामी के बाद आज़ाद हो रहा था, 

हम आजाद फिज़ा में साँस ले रहे थे!

वहीं दूसरे तरफ़ मज़हब के आधार पर देश का बंटवारा !

एक तरफ जहां हमारे स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की

सर्वस्व आहुति का आज़ादी का फल मिल रहा था,

वहीं दूसरे तरफ हमारे अखंड भारत के संकल्प कर्ताओं की संकल्पना चूर - चूर होकर रह गयी !


चूंकि सरहद पर खिंची गयीं लकीरें सिर्फ देश, क्षेत्र या भूभाग का बँटवारा ही नहीं करतीं !

वो बंटवारा कर देती हैं साझी विरासत और सामसिक संस्कृति का !

वो बंटवारा कर देती हैं अतीत के उन्न पन्नों का भी,

जहां पे पहले कभी साथ- साथ वो वो लोग, वो घटनाएं और वो स्थान एक-दूसरे के साक्षी थे, 

वहीं अब वो सरहद पर चले गये हैं !

सच पीरा में सालती है वो विभाजन का वो दर्द !

क्योंकि ज़मीन पर खिंची गयीं लकीरें सिर्फ देश को ही नहीं अलग करती !

वो उन अनेक जिन्दगियों को भी बांट देती हैं।


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