STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Tragedy

3  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Tragedy

एकतरफा प्रेम

एकतरफा प्रेम

1 min
182

हम ना जाने कब उनसे प्यार कर बैठे 

दिल ही दिल में जाने कब इसरार कर बैठे 

उनके बालों, गालो, लबों से इश्क हो गया 

एक मुस्कान पे ही ये दिल फिदा हो गया 

आंखों में उन्हीं की सूरत लबों पे नाम उसका 

रोज निकल रहा था अब तो दीवाला दिल का 

इश्क करना आसान है मगर इजहार नहीं 

सच में बड़े डरपोक थे बहादुर यार नहीं 

वे आंखों की जुबां समझ ना सके 

हम अपने लबों से कुछ कह ना सके 

एक दिन वो घर पे आये, समां बदल गया 

शादी का कार्ड देख के दिल दहल गया 

वे ठाठ से शादी रचा के घर से निकल लिए 

हम आज भी घूम रहे हैं उन्हें यादों में लिए हुए । 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance