डॉलर और सुदामा!
डॉलर और सुदामा!
डॉलर के मोह में,
तू यार मेरे,
सब भूल गया,
मैं नीचे,
ही खड़ा रह गया,
और तू डॉलर के,
पेड़ पर चढ़ गया,
कभी उतारना,
इस नशे को,
जब तन्हा तू,
हो जाए,
दौड़कर आ जाना
पास मेरे,
जब यह सुदामा,
याद आए,
थाम लूंगा,
आगे बढ़कर,
कभी नहीं,
तुझे गिरने दूंगा,
मित्र वही,
सच्चा और अच्छा,
जो मुश्किल में,
काम आए,
बीच भंवर में,
जब तैर रही हो नैइया,
खैवईया बन,
मझधार से भी,
खींच लाए,
मित्र वही सच्चा,
और अच्छा,
जो अंधियारा,
जीवन का,
दूर भगाए,
दोस्त चाहे,
कितना भी हो,
मजबूर,
कृष्ण बने पर,
डॉलर का लोभ,
ना दिखाए,
हरदम मुस्कुराए,
और,
आशा दीप,
जलाए,
अंधियारे से जीवन में,
देकर आशाएं,
उम्मीदों की,
किरण जगाए,
पर,
लोभ ना,
डॉलर का दिखाएं,
सच्चा मित्र वही कहलाए।
