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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Tragedy

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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Tragedy

दानवता के खिलाफ मानवता

दानवता के खिलाफ मानवता

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दानवता का नंगानांच

खेल रहे हैं चहुं ओर।

दर्द में डूबे जीव जन,

रो रहे जंगल के मोर।।


सरेआम कत्ल करते,

लूटपाट का राज है।

पाप कर्म करने वाले,

जन के सिर ताज है।।


दानवता जब हद करे,

आते है देव जन रूप।

मानवता सिखलाता है,

कहलाता है जन भूप।।


मिट जाते पापी पाप,

शांतिदूत बनते लोग।

कुटिल चाल,अनीति,

मिटे भयंकर वो रोग।।


धर्म कर्म जग में पले,

मन में हो यह विचार।

अत्याचार जगत मिटे,

आपस में बढ़े प्यार।।



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