चंचल मन
चंचल मन
मन हुआ चंचल नजारे देखकर
खाने के सब सामान पड़े।
मीठी गुजिया आलू की भुजिया
समोसे कचोरी थोड़ी दूर पड़े।
आलू की टिक्की पिज़्ज़ा बर्गर
ढूंढ रहा मैं इधर-उधर।
ऐसा नजारा देख समझ नहीं आता
अब मैं जाऊं किधर।
बढ़िया सा खाना, हलवा ,मेवा मखाना,
दूध जलेबी रखी है उधर।
मन मेरा चंचल समझ ना आवे
जाऊं इधर या जाऊं उधर।
समस्या भारी, मै भी भारी
मेरा भार है पहुंचा 110 के ऊपर।
डॉक्टर का है कहना संयमित रहना,
रोटी भी ना खाना पूरे दिन में एक से ऊपर।
जल है पीना, फल जूस लेकर जीना।
देखना भी नहीं गरिश्ठ भोजन की तरफ।
मैं नहीं माना, खा लिया खाना
अब मैं बैठा हूं पेट पकड़कर।
दर्द घना है मन नहीं भरा है,
चंचल मन अब भी देखे उधर ।
कुछ तो बताओ मुझे तो बचाओ
जीना नहीं चाहता मैं भूखे मर कर।
