STORYMIRROR

Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Tragedy

4  

Meenaz Vasaya. "મૌસમી"

Tragedy

चलो ऐसे दिवाली मनाएं

चलो ऐसे दिवाली मनाएं

1 min
329

बिखरा चारो और खुशी का प्रकाश,

किंतु एक छोटा बालक है उदास।

मनानी है उस को भी सब की तरह दिवाली,

किंतु कैसे करे?आज खाली है उसकी जोली।

कोई नहीं खरीदता उस के दिए,

सोच में पड़ गया, पैसे कहां से लाए दिवाली के लिए?

आज सब के लिए खुशी का त्योहार,

इस के लिए कोई नहीं लाया उपहार।

सब के पास है नए कपड़े, चूड़ी, हार,

पर वो नत मस्तक ईश्वर को प्रार्थना करता है बारंबार।

चलो अच्छा बनाए उसका त्योहार,

खरीद के उस के पास से दियो की हार।

दे जाए हम उन्हे अपनापन और प्यार,

तभी तो होगा खुश, हम पर वो सर्जनहार।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy