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Chandramohan Kisku

Abstract Others

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Chandramohan Kisku

Abstract Others

चित्र : कल, आज और कल

चित्र : कल, आज और कल

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चलो तो 

एक पल के लिए भी 

केवल एक पल के लिए ही 

सोचो तो 

अपने मन की 

सादा कागज पर 

वह चित्र बनाओ तो 

जिसे अतिक्रम कर 

मनुष्य अब 

श्रेष्ठ पहचाने जा रहे है अब


पूरी दुनिया में 

शासन चल रही है उसकी 

बीत गई जो दिन 

चलो अब उसे थोड़ा याद करो तो 

मनुष्यों के बीच

कैसा 

मार-काट होता था 

भेड़-बकरियों की तरह 

मनुष्यों का वध होता था 


सूली काठ पर 

किस तरह जीशु को 

हाथ में कील द्वारा लटकाया गया था 

क्या तुम्हें याद नहीं हो रहा 

हिटलर की फौज द्वारा 

मनुष्यों पर अत्याचार 

गैस चेंबर में 

हजार-हजार मनुष्यों को अंदर कर 

जिन्दा जला देना 

शव का पहाड़ बनाना 

औरतों की बलात्कार 

क्या तुम्हें याद नहीं हो रहा है 


मनुष्यों का जानवरों की तरह 

खरीदना और बेचना 

बैल सोर भैसों की तरह 

उन्हें खटना

और वैसा ही 

मारना और पिटना भी 

चलो और एकबार 

एक पल के लिए भी 

याद करो तो

वैसा हालत 

अब नहीं है क्या ?


अब भी तो 

मनुष्यों को, मनुष्य मारने में 

आनन्द पाते है 

धड़ से अलग सर 

अपने प्रेमिकाओं को उपहार में देते है 

स्कूलों से 

बलपूर्वक लड़कियों को ले जा रहे है 

और बाजार में 

उन्हें बेच दे रहे है 


यह चित्र 

किसी इतिहास की नहीं है 

सिनेमा का भी नहीं है 

किसी कथाकार के 

दिमाग से भी 

निकला नहीं है 

यह हमारे ही 

दुनिया के 

कल और आज के 

चित्र है 

और हम नहीं जागे तो 

कल का भी चित्र है यह...


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