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Simran Sardana

Romance

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Simran Sardana

Romance

चाँद

चाँद

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मुझे ये तो नहीं मालुम कि

मैं किसे देख कर

अपने चाँद को प्यार से बुलाती हूँ

किसके नाम को याद करके

चाँद की तरफ मुड़ कर देखती हूँ


मुझे ये भी नहीं पता की

वो इंसान मुझे

प्यार करता है भी कि नहीं

या बस उसे देख कर

मुझे चाँद की

और

चाँद को देख कर

उसकी याद आ जाती है


आज चाँद मुझसे

लुका छुपी खेल रहा है

हाँ बिलकुल उसी तरह

जिस तरह मैं तेरे साथ

खेला करती थी

बचपन में


बस फ़र्क़ ये है की

चाँद मुझे अगली रात फिर दिख जाता है

मेरे पास फिर आ जाता है

मेरा सर अपने कंधे पर फिर रख लेता है

मुझे प्यार से फिर सुला जाता है


पर तू?

तू तो आया ही नहीं वापस

एक बार जो कसम दे कर गया

तो मुड़ कर देखा तक नहीं तूने

मेरा हाल तक नहीं पूछा


हाँ लोगो को लगता है कि मैं

दर्द और दुःख की कहानियां सुनाती हूँ

चाँद का तो बस नाम है


पर सच तो ये है कि

जब सब छोड़ कर जा चुके हैं मुझे

तो बस एक ये चाँद है जो

अगली रात फिर आ जाता है मेरे पास

जितना मेरे दिल में और मन में

प्यार बचा है

वो प्यार लेने आ जाता है ये

हर रात


कभी सोने जैसा रंग होता है

तो कभी चांदी जैसा मुँह दिखा जाता है

पर जिस भी सूरत में आता है

बस

हर रोज़ इसे देख कर मेरा

कुछ प्यार बढ़ जाता है


देख रहा है अभी भी मुझे

एक टक लगाए

आँखे झुकाता तक नहीं है

मेरे प्यार में

थोड़ी शर्म से

देखो कैसे मुस्कुरा रहा है


काश एक बार

तुम भी ऐसे

मुस्कुरा देते


काश एक बार

बस पलट कर देख लेते

मेरा हाल


फिर ये चाँद तो क्या

सूरज से भी मोहोब्बत हो जाती मुझे

तारों से भी प्यार कर बैठती मैं

फूल पौधों से भी इश्क़ हो जाता मुझे


क्यूंकि तब तो

हर जगह मुझे

तुम ही तुम दीखते


पर अब

अब तो कुछ हो नहीं सकता

क्यूंकि

अब तो बस मेरे चाँद ने ही साथ देना है मेरा


हाँ तुम नहीं आओगे

तो

लोग कहेंगे कोई और तो आ ही जायेगा


पर क्या मालूम वो भी

तुम्हारी तरह निकले

या फिर

मैं तेरी तरह बन जाऊं


कम से कम अभी

प्यार जताने को

ये चाँद तो है मेरे पास

देखो कैसे एक टक लगाए मुस्कुरा कर

अपने पास बुला रहा है मुझे।


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