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Anushree Goswami

Drama

5.0  

Anushree Goswami

Drama

चाह

चाह

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जो मिला,

उससे दूर रहा,

जो दूर रहा,

उसके करीब जाता रहा !


जो दूर रहा,

वो पास न आया,

जो पास आया,

उसे खोने का,

डर सताता रहा !


जो पाया,

उसे मिटा दिया,

जो मिट गया,

उसका अदृश्य,

महल बनाता रहा !


जो रहा मैं,

वो तो कोई और था,

जो कोई और था,

खुद को वही बनाता रहा !


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