STORYMIRROR

Preeti Sharma "ASEEM"

Drama

4  

Preeti Sharma "ASEEM"

Drama

बुढापे की सनक

बुढापे की सनक

1 min
373

बूढ़े पर बुढ़ापे में,

कुछ ऐसी लगी सनक।


इस उम्र में क्या -क्या कर बैठा

कर दिया सब कुछ गरक।

कानों -कान होते ही

सब को लग गई खबर।


बस बूढ़े के ही दिमाग को,

न लगी जरा भी भनक।

बूढ़े को बुढापे में,

कुछ ऐसी लगी सनक।


हरकतों से उसकी ,

हो गया घर अस्त -व्यस्त।

अपनों को अपना न समझे

बेगानों को कहे अपना।


अपनों को तो, दे गालियां

बेगानों की भरें प्यार से झोलियां।

सब उसको समझायें,

वो न सुने -सुनाये।


खुद को,

समाज सेवी बतलायें।

घर बाहर अजीब झमेला।

कुछ समझ न आयें।


बुढ़ापे की सनक कसम से,

हाय तौबा करवायें।

बुढ़ापे की सनक कसम से,

हाय तौबा करवायें।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama