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Bajrangi Lal

Romance

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Bajrangi Lal

Romance

बिन तुम्हारे दीन थे।

बिन तुम्हारे दीन थे।

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चाहतें थीं दिल में जो भी, जता न पाए हम कभी,

मन तुम्हारा हो गया पर, बता न पाए हम कभी।

इश्क़ का इज़हार कर लूं, तुमसे, दिल करता रहा,

पर इशारों को तुम्हारे, पता न पाए हम कभी।।१।।


रात दिन आराधना में, हम तुम्हारे लीन थे,

रात थी वो शुक्ल-पक्षी, ख्वाब में तल्लीन थे।

हो नही पाई मुखर, जो, चाहते दिल में रहीं,

पास था सब कुछ हमारे, बिन तुम्हारे दीन थे।।२।।



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