STORYMIRROR

Neeraj pal

Abstract

3  

Neeraj pal

Abstract

बिन -गुरु।

बिन -गुरु।

1 min
152

बिन गुरु मुश्किल है, राम- नाम का पाना।

अगर चाहते इनके दर्शन, सद्गुरु के दर ही जाना।।

 

इधर -उधर भव- जाल में पड़कर, जटिल है उनको पाना।।

आत्म दृष्टि गुरु ही देते, जिसने भेद यह जाना ।।


राम मिलावन हार वही है, झूठा सकल जमाना।।

नर रूप में नारायण तुम हो, वेद पुराण बखाना।।


 बिन गुरू भव निधि तरहिं न कोई, मुश्किल है मोक्ष पाना।।

" नीरज "का तो यही है कहना, गुरु में ही राम समाना।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract