भूखे लोगों की दास्तां
भूखे लोगों की दास्तां
जिनका पेट भरा हो उनको,
भूख नजर कहां आती है।
भूख क्या होती है उनसे पूछो,
जिनके बच्चे भूखे सोते हैं।
पहन के खादी बनके गांधी,
फिर जनता में आते हैं।
हाथ जोड़कर उनसे ,
वोट चुरा ले जाते हैं।
फिर होती है जयकार उनकी,
उनको गरीब नजर कहां आते हैं।
खुद खाते हैं काजू गोटा,
उनको भगवान भरोसे छोड़ा जाता है।
खा जाते हैं सारा कोटा,
जो उनके नाम से मिलता है।
फिर उनसे पूछा जाता है,
अब भरपेट सो जाते हो।
जुबान नहीं निकलती है उनकी,
सिर्फ गर्दन हिलाई जाती है।
जो सोते हैं भरपेट उनको, भूख नजर कहां आती है
